श्रेयस अय्यर और टेस्ट क्रिकेट से ब्रेक – पूरी कहानी, कारण और भविष्य
भारतीय क्रिकेट में अचानक आई एक बड़ी खबर ने फैंस को हैरान कर दिया है। श्रेयस अय्यर (Shreyas Iyer), जिन्होंने हाल ही में टीम इंडिया के लिए टेस्ट और लिमिटेड ओवर्स फॉर्मेट में अच्छा प्रदर्शन किया था, उन्होंने फिलहाल रेड-बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट और लंबे फॉर्मेट से दूरी बनाने का निर्णय लिया है।
कहा जा रहा है कि उनका शरीर अब लगातार चार-पांच दिन तक टेस्ट क्रिकेट की शारीरिक और मानसिक थकान झेलने की स्थिति में नहीं है। यह खबर क्रिकेट प्रेमियों और उनके फैंस के लिए चौंकाने वाली ज़रूर है, लेकिन इसके पीछे कई कारण और चुनौतियाँ छिपी हुई हैं। आइए विस्तार से जानते हैं।
श्रेयस अय्यर ने BCCI को लिखित रूप से बताया है कि –
उन्हें लगातार पीठ की जकड़न (back stiffness) और थकान की समस्या हो रही है। उनका शरीर अब रेड-बॉल क्रिकेट की लंबी अवधि का टोल नहीं सह पा रहा। इसी कारण उन्होंने India A की कप्तानी भी छोड़ दी और वेस्ट इंडीज के खिलाफ अनऑफिशियल टेस्ट मैच से नाम वापस ले लिया। अय्यर का साफ कहना है कि वह अभी छोटे फॉर्मेट यानी ODI और T20 क्रिकेट पर फोकस करना चाहते हैं।

क्रिकेट एक्सपर्ट्स के अनुसार
श्रेयस अय्यर पहले भी पीठ और हैमस्ट्रिंग की चोटों से जूझ चुके हैं। लंबे फॉर्मेट में 4-5 दिन तक बैक-टू-बैक बल्लेबाज़ी और फील्डिंग करना उनके लिए कठिन हो रहा है। मॉडर्न क्रिकेट में खिलाड़ी एक ही समय में टेस्ट, ODI, T20 और लीग्स खेलते हैं। सभी फॉर्मेट में फिट रहना हर किसी के लिए संभव नहीं।अय्यर (Iyer) की बल्लेबाज़ी स्टाइल लिमिटेड ओवर्स फॉर्मेट में ज़्यादा सूट करती है। वे खासकर मिडिल ऑर्डर में तेज़ रन बनाने के लिए जाने जाते हैं। टेस्ट क्रिकेट भले ही प्रतिष्ठित है, लेकिन लिमिटेड ओवर्स और IPL से अधिक एक्सपोज़र और आर्थिक लाभ मिलता है। यहाँ यह साफ करना ज़रूरी है कि श्रेयस अय्यर ने पूरी तरह से क्रिकेट से संन्यास नहीं लिया।उन्होंने केवल टेस्ट (रेड-बॉल क्रिकेट) से ब्रेक लेने की बात कही है। भविष्य में अगर उनका शरीर और फिटनेस साथ दे, तो वे वापसी कर सकते हैं।
भारतीय टीम पर असर
मिडिल ऑर्डर की चुनौती टेस्ट टीम में Iyer की जगह अब अन्य बल्लेबाज़ों को मौका मिलेगा । शुभमन गिल, सूर्यकुमार यादव या युवा बल्लेबाज़ विकल्प हो सकते हैं। सीनियर खिलाड़ियों का बोझ बढ़ेगा कोहली, रहाणे जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर और ज़िम्मेदारी आ सकती है। लिमिटेड ओवर्स में मजबूती Iyer अब पूरी तरह से ODI और T20 पर फोकस करेंगे, जिससे भारतीय टीम का मिडिल ऑर्डर और मज़बूत होगा।
फैंस और एक्सपर्ट्स की प्रतिक्रिया
कई फैंस निराश हैं क्योंकि टेस्ट क्रिकेट असली क्रिकेट माना जाता है। वहीं कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि वर्कलोड मैनेजमेंट आज के दौर की ज़रूरत है। युवराज सिंह और सुरेश रैना जैसे खिलाड़ियों ने भी पहले कहा है कि खिलाड़ियों को अपनी बॉडी को सुनना चाहिए। श्रेयस अय्यर अब IPL, ODI और T20 इंटरनेशनल में और ज़्यादा सक्रिय दिख सकते हैं। भारत की 2026 चैंपियंस ट्रॉफी और 2027 वर्ल्ड कप टीम में वह एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन सकते हैं। अगर उनकी फिटनेस बेहतर होती है, तो टेस्ट क्रिकेट में वापसी की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।श्रेयस अय्यर का यह फैसला केवल एक खिलाड़ी का निजी निर्णय नहीं है, बल्कि यह आधुनिक क्रिकेट की हकीकत भी है।जहाँ एक तरफ टेस्ट क्रिकेट खेल की आत्मा माना जाता है, वहीं दूसरी ओर खिलाड़ियों की फिटनेस और करियर मैनेजमेंट भी उतना ही महत्वपूर्ण है।फैंस के लिए यह खबर निराशाजनक हो सकती है, लेकिन शायद यह Iyer के लिए अपने करियर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सबसे सही रणनीति साबित हो।